ज्योतिष के 12 भाव: व्याख्या
भाव आपके जन्म के क्षण के क्षितिज और याम्योत्तर के आधार पर आकाश को बारह खंडों में बाँटते हैं, और हर एक जीवन के एक क्षेत्र को दर्शाता है। राशियाँ बताती हैं कैसे, ग्रह बताते हैं क्या, और भाव बताते हैं कहाँ। चूँकि वे दिन में एक बार घूमते हैं, इसलिए सटीक जन्म-समय और स्थान चाहिए।
भाव 1: स्व
रूप-रंग, पहली छाप और जीवन के प्रति दृष्टिकोण। यह लग्न से शुरू होता है।
भाव 2: संसाधन
धन, संपत्ति, कमाने की क्षमता और आत्म-मूल्य।
भाव 3: संवाद
सीखना, भाषा, भाई-बहन, पड़ोसी और छोटी यात्राएँ।
भाव 4: घर
परिवार, जड़ें और आपकी भावनात्मक नींव। यह पाताल (IC) से शुरू होता है।
भाव 5: रचनात्मकता
रोमांस, खेल, शौक़, संतान और आत्म-अभिव्यक्ति।
भाव 6: कार्य और स्वास्थ्य
दैनिक दिनचर्या, कार्यस्थल, स्वास्थ्य की आदतें और सेवा।
भाव 7: साझेदारी
विवाह, व्यावसायिक साझेदार, अनुबंध और आमने-सामने के रिश्ते। यह अस्त भाव (डिसेंडेंट) से शुरू होता है।
भाव 8: आत्मीयता
साझा संसाधन, विरासत, कामुकता और परिवर्तन।
भाव 9: खोज
उच्च शिक्षा, दर्शन, धर्म और विदेश यात्रा।
भाव 10: करियर
प्रतिष्ठा, व्यवसाय और सार्वजनिक छवि। यह दशम शिखर (MC) से शुरू होता है।
भाव 11: समुदाय
मित्र, समूह, नेटवर्क और भविष्य की आशाएँ।
भाव 12: अदृश्य
एकांत, छिपी शक्तियाँ, उपचार और अवचेतन।
भाव पद्धतियाँ
भावों को बाँटने के कई तरीक़े हैं। हम सबसे प्रचलित पद्धति प्लेसिडस का उपयोग करते हैं, और 66° अक्षांश से ऊपर, जहाँ प्लेसिडस की गणना संभव नहीं, पोरफ़िरी पर आ जाते हैं।